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Mar 30, 2010

महफ़िल


यारों की
इस महफ़िल में
हर कोई
खुश नजर आता है
हर एक की
तक़दीर का सितारा
चमकता हुआ
नजर आता है
एक हम है
सितारा तो दूर
जिन्दगी से भी
बेजार नजर आते है
भूले से काश
कोई सितारा
टूट क़र
हमारे दामन में भी
आ गिरता !

Mar 3, 2010

खिलौना


तेरी दास्तान समझ न सका कोई
बचपन से मृत्यु के अन्तिम सफ़र तक
ए जिन्दगी !
कितनी ही परिभाषाएँ बना डाली,
कवियों,महापुरषों ने तुझ पर
पर
तू अपने में ही
मस्त लहराती
तय करती रहती है
सुबह शाम
अपना सफ़र
इस कशमकश में
कोई गम से बन गया शराबी
कोई पागल, कोई कवि, कोई शायर
शायद
कोई-कोई देखकर रंग तेरे
तोड़ गया दम
आधे सफ़र में
दूर खड़ी हंसती है तू
बेबसी पर इन्सान की
किसी-किसी का बना डाला जीवन
जानवर से भी बदतर
क्यों
मेरी परिकल्पना का रूप समझ रहा है
शायद
बनाई है
कितनी रंग बिरंगी खेलने को वस्तुएँ
इन्सान के लिए
पर
अपने लिए खेलने को
सिर्फ इन्सान !

Feb 25, 2010

वादा


जिन्दगी मे किसी से,
किया वादा
निभा सकूँ, या ना निभा सकूँ
पर तुझ से तो वादा निभाना ही पड़ेगा
ए मौत !

जजबात मे बहकर
कभी तुझ से भी, वादा किया था मैंने
तू सौं शक्लो मे लहराती फिरती है
पहले
जब कभी ध्यान आता था
की तुझ से वादा निभाना है
तो तेरी
हर शक्ल की हर लहर से ही
कांप उठती थी जिन्दगी
पर
आज ना जाने क्यों
तुझे अपनाना चाहती है जिन्दगी
तेरी लहरों में, लुप्त हो जाना चाहती है जिन्दगी
तेरी आगोश में सर रखकर, सो जाना चाहती है जिन्दगी
अपनी आखरी शाम
तेरे दामन में समेट देना चाहती है जिन्दगी
तेरे से वादा निभाने की, मोहर बन कर रह गई है जिन्दगी
तेरे नाम से ही थोडा बहुत
शाम ढ़लने का मंजर, ख़ूबसूरत सा लगता है
इस जिन्दगी में
तेरे ही दम से बहार रह गई है
इस जिन्दगी में
बस तेरे से ही
वादा निभाने का इंतजार रह गया है
इस जिन्दगी में
लिबास ओड़कर काली स्याही का
आ भी जा
जिन्दगी की मोहर पर लिखे
अपने वादे का
वादा निभा भी जा !

शामे-गम


शामे-गम
अँधेरे के साए घिरने लगे ,
दिल का चिराग रोशन हुआ
दिमाग में कोंधी बिजली,
सादगी चाहिए
गुजारने को जिन्दगी,
उभरा चाँद उफक पर, तारे चमके,
मगर हम
तरसते रहे रोशनी के लिए !

शामे-गम
दिमाग भोझिल
दिल में उभरे यादों के अक्स
कुछ ऐसे,
जो भुलाये न भूले
शाम की गहराई
जाने कब
डूब चुकी थी अँधेरे के समन्दर में,
और मै सोचता ही रह गया !

शामे-गम
पड़ गई नजर बरगद की शाख पर
चिड़ियों की चचाहाहट
दिन भर की भटकन के बाद
रैन बसेरे में आ कर
कितने खुश है ये पंछी
सूरज जब निकलेगा ,
उड़ जाएँगे,फिर से
जिन्दगी की तलाश में !

आज की यह शाम ढलेगी
जिन्दगी का एक और दिन
समेट कर ले जाएगी !

शामे-गम
एक सितारा टूटा आसमान से
जैसे किसी की किस्मत का टूटा हो तारा,
बैठे ही बैठे झपकी सी आ गई
हाथ में कलम और मेज पर कागज थे,
और शायद मै कवि बन गया था !

खुली जब आँख,
आसमान लाल था !
मै हैरान था !
अब उफक की लाली थी
शामे- गम का कहीं पता ना था !